Tuesday, January 8, 2019

राहुल ने उप्र में अकेले चुनाव लड़ने के संकेत दिए, कहा- कांग्रेस को हल्के में लेना बड़ी भूल होगी

कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ सकती है। गल्फ न्यूज को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा- कई दिलचस्प चीजें हैं, जिन्हें कांग्रेस उत्तर प्रदेश में कर सकती है। उत्तर प्रदेश के लिए कांग्रेस का आइडिया काफी मजबूत है। ऐसे में हमें अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा है और हम लोगों को चौंका देंगे।

विपक्ष को साथ लाने का प्रयास कर रहे- राहुल

यह पहला मौका है जब राहुल ने उप्र में अकेले चुनाव लड़ने के बारे में संकेत दिए हों। इससे पहले बसपा और सपा ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस को समर्थन दिया। राहुल ने कहा, "हम सभी विपक्षी पार्टियों को साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं। मैंने मीडिया में कुछ बयान सुने हैं, लेकिन हम मिलकर काम करने जा रहे हैं, हमें विश्वास है कि हम मोदी को हराएंगे। लेकिन मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि उप्र में कांग्रेस को हल्के में लेना बड़ी गलती है।''

राहुल ने कहा- हमारा पहला मकसद नरेंद्र मोदी को हराना है। जिन राज्यों में हम मजबूत हैं या हम पहले नंबर पर हैं, वहां भाजपा के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ेंगे। महाराष्ट्र, झारखंड, तमिलनाडु, बिहार में गठबंधन की संभावनाएं हैं। यहां गठबंधन का फॉर्मूला तैयार करने पर काम चल रहा है। मोदी को हराने के लिए हम अन्य राज्यों में गठबंधन करने की कोशिश कर रहे हैं।

सपा-बसपा कांग्रेस के साथ के पक्ष में नहीं

राहुल का बयान उस वक्त आया, जब देश के सबसे बड़े राज्य उप्र में सपा-बसपा ने एकसाथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायवती कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं हैं। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों पार्टियां कांग्रेस के लिए सिर्फ दो सीटें रायबरेली और अमेठी छोड़ सकती हैं, जहां से सोनिया गांधी और राहुल गांधी सांसद हैं।

अभी संविधान में जाति और सामाजिक रूप से पिछड़ों के लिए आरक्षण का प्रावधान है। संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 15, 16 में आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान जोड़ा जाएगा। अभी एससी को 15%, एसटी को 7.5% और ओबीसी को 27% आरक्षण दिया जा रहा है।

सरकार संविधान के अनुच्छेद 15 में संशोधन करना चाहती है, जिसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की तरक्की के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार मिलेगा।

विशेष प्रावधान उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश से जुड़े हैं। इनमें निजी संस्थान भी शामिल हैं। फिर भले ही वे राज्यों द्वारा अनुदान प्राप्त या गैर अनुदान प्राप्त हों। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

बिल साफ करता है कि आरक्षण मौजूदा आरक्षण के अतिरिक्त होगा और प्रत्येक कैटेगरी में कुल सीट का अधिकतम 10% होगा।

नरसिम्हा सरकार समेत 9 राज्यों के फैसले अटके
1991 में केंद्र सरकार ने सवर्णों को 10% कोटा देने का फैसला किया था। 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया। 2003 में भाजपा, 2006 में कांग्रेस ने इसके लिए मंत्री समूह बनाए थे। आरक्षण की मांग को लेकर मराठा, गुर्जर और जाट जैसे समुदाय लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में 10% आरक्षण के कानून भी बने। लेकिन, संविधान आड़े आ गया था।

No comments:

Post a Comment